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5 Best gautam buddha story hindi भगवान बुद्ध की कहानियां।

by Sonal Shukla
Gautam buddha story hindi

दोस्तों भगवान बुद्ध के जीवन से बहुत कुछ सीख सकते हैं, आज के इस लेख में हम जानेंगे 5 best gautam buddha story hindi भगवान बुद्ध की कहानियां, यकीन मानिए आपको यहां से बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।

भगवान बुद्ध की एक कहानी आपकी life बदल सकती हैं, इसलिए सभी कहानियों को अंत तक जरुर पढ़े।

5 best gautam buddha story hindi भगवान बुद्ध की कहानियां।

1 बीते कल को भूल कर आगे बड़ना चाहिए।

भगवान बुद्ध एक शांत स्वभाव के व्यक्ति देखते थे, लोग भले ही उनको कितना कठोर बोल देते थे कितना ही अपमान करवा देते है, फिर भी महात्मा बुद्ध कभी गुस्सा नहीं करते थे. यह कहानी भी ऐसी ही है, एक व्यक्ति भगवान बुद्ध का अपमान कर देते है.

बात यह है की महात्मा बुद्ध एक गांव में धर्म सभा को संबोधित कर रहे थे, वहा पर बैठे सभी व्यक्ति शांति से भगवान बुद्ध के प्रवचन सुन रहे थे, उस सभा ,में एक आदमी उठता है और महात्मा बुद्ध से कहने लगता है, बुद्ध तुम एक डोंगी हो, जो सिर्फ लोगों को बेवकूफ बनाते हो, तुम लोगों का धर्म भ्रष्ट कर रहे हो. वह व्यक्ति महात्मा बुद्ध को बहुत गालियां देता है, और अनेक अपशब्द बोलता है, यह सब सुनकर भी भगवान बुद्ध चुप रहते है और अपने प्रवचन जारी रखते है.

यह देखकर वह व्यक्ति और ज्यादा गुस्सा हो जाता है, और वह भगवान बुद्ध के पास आता है और उनके मुंह पर मिट्टी फेंक कर मारता है, और वो भगवान बुद्ध की सभा छोड़ कर अपने घर चला जाता है.

जब वह व्यक्ति अपने घर पहुँच जाता है, तो उसको बहुत बुरा लगता है, सोचता है की मुझे महात्मा बुद्ध ऐसा नहीं करना चाहिए था और अपने किए किराए पर उसको बड़ा अफ़सोस होता है. उसके मन में आता है की मुझे महात्मा बुद्ध से इसके लिए माफ़ी माँगना चाहिए और वो व्यक्ति महात्मा बुद्ध से क्षमा मांगने के लिए उसी जगह पर जाता है.
उसको पता चलता है की महात्मा बुद्ध तो उस नगर से दूसरे नगर निकल गए है, तब वह व्यक्ति पुरे एक दिन का सफर कर के दूसरे नगर में पहुंचता है. और महात्मा बुद्ध के चरणों में गिरकर क्षमा मांगने लगता है.

तब महात्मा बुद्ध उस व्यक्ति से पूछता है, कौन हो तुम और क्षमा क्यों मांग रहे हो, इस पर व्यक्ति बोलता है महात्मा आप मुझे भूल गए हो, मै वही हु जिसने आपका कल अपमान किया था, भला बुरा कहा था.

महात्मा बुद्ध कहते है मै कल की बातो को वही छोड़ आया और बिता हुआ कल को भूल गया हु, तुम अभी भी कल की बातो को याद के परेशान हो रहे हो. तुम्हे अपनी गलती का अहसास हो रहा है, तुम्हे पछतावा हो रहा है, तुम अब निष्पाप हो गए हो.

दोस्तों इस कहानी के माध्यम से भगवान बुद्ध यह संदेश दे रहे की, बिता हुआ कल को याद करके अपना आज का समय बर्बाद न करे, क्योंकि जो हो गया वो वापिस लौटकर नहीं आएगा। और बुरी बातें याद रखने से हमारा आज का समय बर्बाद हो जाता है. इस आदत की वजह से हमारा फ्यूचर बर्बाद हो सकता है, इसलिए भगवान् बुद्ध कहते है व्यक्ति को बीते हुए कल को याद करके आगे बढ़ना चाहिए।

2 असली दान क्या हैं? भगवान बुद्ध की कहानी। Gautam buddha story in hindi

एक बार भगवान बुद्ध किसी धर्म सभा को संबोधित करने के एक समृद्ध नगर में जाते है, जैसे ही नगर के लोगो को पता चलता है, की महात्मा बुद्ध हमारे नगर में धर्म सभा को संबोधित करने आ रहे है.

तो वहां के बड़े बड़े राजा महाराजा, साहूकार, जमींदार और सभी समृद्ध लोग महात्मा बुद्ध के लिए सभी अपने अपने अनुसार बड़े बड़े उपहार लाते है, और एक एक करके सभी लोग भगवान् बुद्ध को महंगे से महंगे उपहार भेंट करते है.

और महात्मा बुद्ध अपना बाय हाथ से इसारा करते है और उन सभी महंगे उपहारों को एक तरफ रखने की बोल देते है.

सभी समृद्ध लोग महात्मा बुद्ध को बड़े बड़े उपहार देकर अपने आप को ऊँचा दिखने की कोशिश कर रहे थे.

उसी नगर में एक वृद्ध व्यक्ति रहता था जिसके पास खाने को भी कोई चीज नहीं थी, वह दिनभर भीख मांगकर या जहा से कुछ भी मिलता था. उससे अपना पेट भर लेता था और इसी प्रकार अपना गुजारा करता था.

उस व्यक्ति को भी पता चलता है, की भगवान बुद्ध उसकी नगरी में आए हुए है, वह भी महात्मा बुद्ध को कुछ देना चाहता था.

लेकिन उसके पास देने को कुछ नहीं था, वह व्यक्ति एक आम के पेड़ के निचे बैठा हुआ था और आम के पेड़ से गिरा हुआ आम खा रहा था.

उसके मन में विचार आया की महात्मा बुद्ध को क्यों नहीं यह आधा आम भेंट दिया जाए.

और वो व्यक्ति भगवान बुद्ध के पास जाता, भगवान बुद्ध के सम्मुख खड़ा होकर उनसे भेंट स्वीककार करने की बोलता है.

महात्मा बुद्ध अपने आसान से उठकर अपने दोनों हाथो से उस व्यक्ति का आधा आम भेंट के रूप में स्वीकार करते है.

यह सब देखकर वहा बैठे बड़े बड़े लोग और राजा महाराजा आश्चर्य चकित रहे जाते, वह मन ही मन में सोचते है, की हमारे द्वारा बड़े बड़े उपहार दिए है, उसके लिए महात्मा बुद्ध खड़े तक नहीं हुए है.

जबकि इस निर्धन और गरीब व्यक्ति द्वारा दिया गया आधा आम के लिए, स्वमं खड़े हुए और अपने दोनों हाथो से भेंट स्वीकार करने लगे.

वहा बैठे लोगो में से एक व्यक्ति खड़ा होता है, और भगवान बुद्ध से पूछता है, हे महात्मा हमारे द्वारा दिए गए बड़े बड़े उपहारों में आपकी कोई रूचि नहीं है. और आपने इस व्यक्ति द्वारा दिया गया आधा आम के लिए आप स्वमं खड़े हुए है, और भेंट स्वीकार की है.

तब महत्मा बुद्ध कहते है, आप इतने समृद्ध है, फिर भी आप अपनी धन दौलत का कुछ हिस्सा ही दिया है.

जबकि यह व्यक्ति गरीब है और निर्धन हैं, फिर भी इसने मुझे अपनी सारी संपत्ति दान कर दी है, वास्तव मे यहीं सबसे बड़ा दानी है।

Moral of gautam buddha story in hindi

दोस्तों इस कहानी के माध्यम से भगवान बुद्ध हमें यह संदेश देना चा रहे हैं, दान छोटा या बड़ा नही होता है। और यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपके पास कितना है और आप कितना दान कर रहे हैं।

असली धानी वहीं व्यक्ति होता है जो, अपना बीना कुछ परवाह किए बिना अपना सब कुछ दान कर देता है।

3 इस दुनियां में कोई गरीब नही होता है। भगवान बुद्ध की कहानी। gautam Buddha story in hindi

एक समय की बात है, जब भगवान बुद्ध एक गांव में धर्म सभा को संबोधित कर कर रहे थे. कही दूर दूर से लोग अपनी परेशानियों को लेकर भगवान बुद्ध के पास आते है।

लोग भगवान बुद्ध के पास परेशान होकर आते है और जाते समय उनके चेहरे पर मुस्कान बनी रहती है. क्योंकि भगवान बुद्ध सभी लोगो की समस्याओं का हल निकाल देते है. 

वही उसी गांव के पास एक गरीब और निर्धन व्यक्ति रहता था, जो देखता है की भगवान बुद्ध के पास जितने भी लोग आते है.

आते समय तो उनके चेहरे पर परेशानियों के बादल रहते है लेकिन जब वह वहा से निकलते है तो उनके चेहरे पर मुस्कान बनी रहती है.

वह व्यक्ति सोचता है की मै भी इतना गरीब हु तो क्यों नहीं मेरी समस्या भी भगवान बुद्ध के सामने रखे उनको अपनी समस्या बताएं।

ताकि मेरी समस्या का हल हो और मेरी गरीबी दूर हो. यह सोच वह गरीब व्यक्ति भगवान बुद्ध के पास जाता है. 

वह व्यक्ति जाता है, और देखता है की वहा पर लोगो की लाइन लगी हुई है, वह अपनी बारी आने का इन्तजार करता है।

जैसे ही उस व्यक्ति की बारी आती है वह व्यक्ति भगवान बुद्ध के सामने हाथ जोड़कर खड़ा हो जाता है और अपनी बात कहने लगता है।

वह व्यक्ति भगवान बुद्ध के समुख खड़ा होकर भगवान बुद्ध से कहता है, महात्मा इस नगर में सभी लोग ख़ुशी है। सभी के पास धन सम्पदा है, मै ही गरीब और दुखी इंसान क्यों हु।

इस बात पर भगवान बुद्ध मुस्करा कर कहते है, तुम इसलिए गरीब हो की तुम किसि को कुछ देते नहीं हो.  इस बात पर वह व्यक्ति कहता है, महात्मा मेरे पास देने को कुछ नहीं है, मै खुद एक निर्धन व्यक्ति हु, मै भीख मांग कर अपना गुजारा करता हु मेरे पास देने को कुछ नहीं है, भला मै  किसी को क्या दे सकता हु. 

भगवान् बुद्ध कहते है, कौन  कहता हैं तेरे पास देने को कुछ नहीं है, ईश्वर ने तुम्हे जुबान दी है, किसि को दो मीठे बोल दे सकते है किसी के तारीफ़ कर सकते है।

ईश्वर तुझे दिमाग दिया है किसि को अच्छे सुझाव दे सकता है, दो हाथ दिए है किसि की मदद कर सकता है. क्यों अपने आप को निर्धन समझता है।

यही कारण है की तू आज तक गरीब और दुखी है. क्योकि तू सोचंता है मेरे पास देने को कुछ नहीं है और अपने आप को गरीब और दुखी मानता है.

भगवान् बुद्ध कहते है, जो व्यक्ति अपने आप को निर्धन और गरीब मानता है, वह जीवन में कभी भी खुश नहीं हो सकता है.

दोस्तों भगवान् बुद्ध कहते है, कभी भी अपने आप को निर्धन और गरीब ना समझे, गरीबी और दुःख अपने आप दूर हो जायेंगे, यह बात सुनकर वह व्यक्ति बहुत प्रसन्न होता और उसी समय से अपने आप को सपन्न मानता है.

4 भगवान बुद्ध की कहानी। अपने दुखों का कारण आप ही हों। gautam Buddha story hindi

प्राचीन समय की बात है, भगवान बुद्ध धर्म प्रचार करने के लिए अलग अलग नगर में घूमते थे और वहा के लोगों को धर्म के बारे में शिक्षा देते थे।

एक बार भगवान बुद्ध ऐसे नगर में पहुंचे जहां उनको डोंगी समझा जाता था, वहा के लोग भगवान बुद्ध को धर्म भ्रष्ट करने वाला व्यक्ति समझते।

सभी नगर के लोगों के मन में धारणा थी कि यह व्यक्ति धर्म भ्रष्ट करता हैं, इसलिए वहा के लोग भगवान बुद्ध को अपना दुश्मन मानते थे।

जब भगवान बुद्ध उस नगर में पहुंचे तो, वहा के लोग उनको भला बुरा कहने लगे, गलत शब्दो का इस्तेमाल करने लगें, बुद्ध को बद्दुआएं देने लगे।

भगवान बुद्ध सभी लोगों के अपशब्द को बड़े ध्यान से सुन रहे, और बिलकुल शान्त लग रहे थे, मानो ऐसा लग रहा था कि बुद्ध की बातो पर उनका कोई असर नहीं पड़ रहा है।

लेकिन उस नगर के लोग बोल बोल थक गए तो अपने आप चुप हो गए, तब महात्मा बुद्ध बोले, क्षमा चाहता हूं, अगर आपकी बाते पूरी हो गई है तो मैं बोलूं।

यह सब देख कर वहा के लोग आश्चर्य चकित रहे गए, एक आदमी बोला, महाराज हम आपका गुणगान या तारीफ नहीं कर रहे हैं, हम आपकों भला बुरा कहें रहें गालियां दे रहे हैं, और आप इतने शान्त और प्रसन्न दिख रहे हैं। क्या आपके उपर इसका कोई असर नहीं पड़ता?

तब भगवान बुद्ध बोले, आप गालियां दे रहे हैं या अपशब्द बोल रहे हैं, इन सभी शब्दो को मैं स्वीकार नहीं कर रहा हूं, जब तक मैं किसी बात को स्वीकार ही नहीं करता हूं तो इसका मुजपर कोई असर नहीं पड़ता है।

और भगवान बुद्ध बोले, जब मैं इन गालियों या अपशब्द को स्वीकार ही नहीं करता हूं तो यह कहां रहे जायेगी, आपके पास ही रहेगी।

Moral of this story

दोस्तों भगवान बुद्ध की इस छोटी से कहानी से हमें बहुत बड़ा संदेश मिलता है, क्योंकि अधिकतर लोग दुसरे की बातों को सुनकर दुखी रहते हैं।

और अपने दुखों का कारण दुसरे लोगों को मानते हैं, दोस्तो जबकि यह बिल्कुल गलत है, दुःख होना या नहीं होना यह आपके उपर निर्भर करता है।

आप दूसरों की बातों को स्वीकार करते हैं या नहीं करते हैं। आप दूसरों की बातों को किस तरह से देखते हैं यह पूरी तरह आपके उपर निर्भर करता है।

5 सही समय का इंतजार कीजिए। भगवान बुद्ध की कहानी। gautam Buddha story hindi

एक समय की बात है जब भगवान बुद्ध अपने शिष्यों के साथ जंगल में जा रहे हैं, जंगल बहुत बड़ा होने के कारण उनको पूरे दिन का सफर तय करना था।

गर्मी बहुत तेज थी, कुछ समय जलने के बाद सभी शिष्यों को पानी की प्यास लगी और सभी शिष्य पानी की खोज करने लगें।

यह बात भगवान बुद्ध भी अच्छी तरह से जानते थे, उन्होंने सभी शिष्य को कहा शान्त हो जाएं और इस बरगद के पैड के नीचे बैठ जाएं। सभी शिष्य भगवान बुद्ध की बात मान कर बरगद के पैड की छाया में बैठ जाते हैं।

तब भगवान बुद्ध सभी शिष्यों से कहते हैं, जाओ सभी इस बरगद के पैड की परिक्रमा करो, सभी शिष्य भगवान बुद्ध की बात मानकर बरगद के पैड की परिक्रमा करते हैं और भगवान बुद्ध के पास आकार बैठ जाते हैं।

तब भगवान बुद्ध पूछते हैं, की बताओ किस दिशा से ठंडी हवाएं आ रही है, एक शिष्य बताते हैं कि पूर्व दिशा की और से ठंडी हवाएं आ रही है।

भगवान बुद्ध कहते हैं आप पूर्व दिशा की और पानी की खोज करने जाओ, इस पानी मिलने के चांस ज्यादा है।
वह शिष्य भगवान् बुद्ध की आज्ञा मानकर पूर्व दिशा में पानी की खोज करने जाता है।

कुछ समय बाद उसको कुछ दुरी पर एक पानी का तालाब मिलता है, जहा पर वाक्य में पानी भरा रहता है. जैसे ही शिष्य पानी पिने और अपने कमण्डल में पानी भरने लगता है।

वह देखते है की तालाब के उस किनारे पर एक महिला अपने वस्त्र दो रही थी, शिष्य यह देखकर सोचने लगा की यह पानी तो दूषित हो गया।

लेकिन वह देखता है, की इस किनारे का पानी साफ और सुथरा है, वह पानी भरने के लिए झुकता है, उसी समय तालाब में से एक बैलगाड़ी गुजरती है, जिससे तालाब का पानी गन्दा हो जाता है, क्योकि पानी के निचे जमी हुई मिटटी ऊपर आ जाती है.

यह सब देखकर शिष्य बहुत परेशान होता है, और पीना पिए भगवान बुद्ध के पास लौटकर आ जाते है, और पूरी कहानी भगवान बुध को बताता है।

भगवान बुद्ध सभी शिष्यों से शांत होकर बैठ जाने की कहते है, सभी शिष्य शांत होकर बैठ जाते है। कुछ समय बाद भगवान बुद्ध फिर से अपने उसी शिष्य को उसी तालाब से पानी लाने के लिए कहते है।

उसको को बुरा तो लगता है, लेकिन उनकी आज्ञा भी नहीं टाल सकते है, शिष्य पानी लेने के लिए उसी तालाब की और जाता है।

जब वह तालाब पर पहुंचे तो देखा पूरा पानी साफ़ और सुथरा दिख रहा था, यह सब देखकर शिष्य बहुत खुश होता है, सभी पानी पीते और भगवान बुध के लिए कमांडल में पानी ले जाते है.

यह सभी देखकर सभी शिष्य आश्चर्यचकित रहे जाते, सभी मन ही मन में सोचने लगते है यह चमत्कार कैसे हुआ। उसमे से एक शिष्य ने भगवान बुद्ध से पूछ लिया, आपने यह चमत्कार कैसे किया।

तब भगवान बुद्ध ने कहा यह कोई चमत्कार नहीं है, यह सब आपके धैर्य का फल है, जितनी देर आपने धैर्य रखा उतनी देर में तालाब का पानी साफ़ हो गया मिटटी पानी के अंदर जम गई और पानी बिलकुल साफ हो गया. 

वही अगर आप सभी धैर्य नहीं रखते और दुःख और परेशानी में दूसरे तालाब जाने का निर्णय कर लेते तो हो सकता आपको तालाब भी नहीं मिलता और प्यास के मारे आपके प्राण भी निकल जाते, इसलिए यह कोई चमत्कार नहीं है  धैर्य का परिणाम है.

भगवान बुद्ध ने कहा आपने धैर्य रखकर सहि समय के इन्तजार किया  इसलिए हम सभी को अच्छा पानी पिने को मिला और परिणाम पॉजिटिव निकला।

दोस्तों इस कहानी से माध्यम से भगवान् बुद्ध यह बताना चा रहे है की व्यक्ति को छोटी छोटी कठिनाइयों से घबराना नहीं चाहिए।

बल्कि धैर्य और साहस बनाए रखना चाहिए, साथ में सही समय का इन्तजार करना चाहिए आपको अच्छे परिणाम जरूर मिलेंगे।

आज कल हम देख्रते है की ज्यादातर लोग किसी छोटी मुश्किल में अपना धैर्य खो देते है, जिसके वे लोग या तो अपना लक्ष्य बदल लेते है, या कुछ गलत कदम उठा

Conclusion

उम्मीद करते हैं आपको 5 Best gautam buddha story hindi से बहुत कुछ सीखने को मिला होगा।

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